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कोई दे खुशी का तिनका

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कोई दे खुशी का तिनका उसपे ये जाँ निसार हम दे सके खु़शी गर ये ख़ुदा का इख़्तियार। कोई साथ दे तो एहसाँ रक्खेंगे ज़िंदगी भर उस ख़ुशफहम की ख़ातिर रह लेंगे ख़ारज़ार। कोई पूछे खै़रियत तो कहें हम है खै़रियत से मिले कोई ग़मग़ुसार तो कहें हम भी है ग़म-ए-यार। कोई लेगा इंम्तेहाँ तो दे जवाब इंम्तेहानन उसके इक इश्तेबाह(शक़) पर दे इंम्तेहाँ हज़ार। कोई है बरसता सावन कॊई ग़म का तलबग़ार कोई ग़म में मुस्कुराए कोई रोए ज़ार ज़ार । ’रूद’

चांद

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चांदनी में है चमकता हुआ रौशन सा जहाँ... इक चांद है वहाँ...... झिलमिलाते है इन आँखों में इशारे से जवाँ.. इक चांद है वहाँ..... तेरे दीदार से रौशन मेरा जन्नत-ए-जहाँ.. तू चांद है वहाँ..... झिलमिलाती हुई चांदनी यूँ छुपी है कहाँ? तू चांद है जहाँ....

कुछ भी रह जाए ना बाकी़ अब यहाँ से

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जहान-ए-रौशनी में हम

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जिस्म का चराग़ जले फ़िर ये क्यूँ है रौशनी दो दिलों के बीच छिडी अब दिलों की रागनी। उस चाँद के आगोश में अब चांदनी भी झूम उठे जिस्मों जहाँ पे लम्स(स्पर्श) की खिलने लगी है चांदनी। खुशबू है फैली कूबकू रूह पारही सुकूँ हुस्नो जिस्म ख़ामोशी से कर रहे तानाज़नी। दो किनारे एक हो चले लबे आरज़ू बुझी जले पहलूनशी है दो दिल मिले चले सिलसिले शबे नाज़नी। https://www.facebook.com/photo.php?v=1571940382030&set=vb.1341142587&type=2&theater

मैं हूँ ग़ज़ल....my ghazal album

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मैं हूँ ग़ज़ल....my ghazal album

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